
स्कूल से लगातार गायब शिक्षक पर मेहरबानी? शिक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल, आखिर कार्रवाई कब?
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही।शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला कोटमीखुर्द, विकासखंड गौरेला में पदस्थ शिक्षक पन्नालाल देवांगन के लगातार बिना सूचना के अनुपस्थित रहने का मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि शिक्षक लंबे समय से विद्यालय से अनुपस्थित हैं, लेकिन उनके खिलाफ अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

एक ओर राज्य शासन स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने, नियमित निरीक्षण और शिक्षकों की शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दे रहा है, वहीं दूसरी ओर विकासखंड स्तर पर इन निर्देशों का पालन होता नजर नहीं आ रहा। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि कोई शिक्षक लगातार बिना सूचना के अनुपस्थित है तो उसके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही?
मामले को लेकर प्रभारी विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) उपेंद्र सिंह ठाकुर की कार्यशैली भी सवालों के घेरे में है। क्या विद्यालयों का नियमित निरीक्षण नहीं किया जाता? क्या अधिकारियों को यह जानकारी नहीं कि कौन शिक्षक स्कूल आ रहा है और कौन नहीं? यदि जानकारी है तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई, और यदि जानकारी नहीं है तो निरीक्षण व्यवस्था पर ही सवाल खड़े होते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि एक शिक्षक की अनुपस्थिति का सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ता है। सबसे बड़ा नुकसान उन बच्चों का होता है जिनके भविष्य की जिम्मेदारी सरकार और शिक्षा विभाग पर है।

अब सवाल यह है कि क्या शिक्षा विभाग इस मामले में केवल मौन रहेगा, या फिर बिना सूचना के लगातार अनुपस्थित शिक्षक के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करेगा? साथ ही यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि इस पूरे मामले में जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी या नहीं।
















